Thursday, February 27, 2025

कुम्भ राशि में हो रहे शनि अस्त, सभी राशियों पर पड़ेगा विविध प्रभाव

 

कुम्भ राशि में हो रहे  शनि अस्त, सभी राशियों पर पड़ेगा विविध प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में शनि का गोचर, वक्री होना और अस्त होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंभ राशि के स्वामी ग्रह शनि देव को माना गया है ग्रहों की चाल में शनि का स्वयं की राशि में अस्त होना अत्यंत  महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि  सभी नौ ग्रहों में शनिदेव की गति सबसे धीमी है वैदिक पंचांग के आधार  ज्योतिर्विद  डॉ. संजय गील ने बताया की  न्याय के देवता शनि कुंभ राशि में शुक्रवार, 28 फरवरी 2025 को रात्रि  07.06 मिनट पर अस्त होकर  और बुधवार,  9 अप्रैल 2025 को सुबह 05.03 पर मीन राशि में उदय होंगे वर्तमान में शनि कुंभ राशि में है एवं शनिवार, 29 मार्च 2025 को रात 9:41 पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे ज्योतिषीय गणनाओ  के अनुसार शनि अस्त होने के बाद अपनी कमजोर अवस्था में रहेंगे, किन्तु  वर्तमान में  सूर्य और शनि की युति कुंभ राशि में होने से सभी राशियो को प्रभावित अवश्य ही करेंगे

इसी प्रकार शनिवार,  29 मार्च 2025 को शनि के  मीन राशि में प्रवेश करते ही  कुछ राशियों  पर साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू हो जाएगी तो कुछ को इससे राहत मिलेगी मुख्यतः  शनी के गोचर के साथ ही  मकर राशि वालों पर चल रही साढ़ेसाती खत्म होकर  मेष राशि पर साढ़ेसाती प्रारंभ होगी साथ ही मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण, कुंभ राशि पर अंतिम चरण और मेष राशि पर पहला चरण शुरू होगा। वृश्चिक राशि के जातकों पर जहां ढैया समाप्त होगी जबकि धनु राशि वालों पर ढैया की शुरुआत हो जाएगी ज्योतिषीय गणना और मान्यताओ के आधार पर वर्तमान में शनि अस्त के अस्त होने का प्रभाव इस प्रकार देखा जा सकेगा -

मेष राशि - सामाजिक संबंधों और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव

वृषभ राशि – रोज़गार संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है उच्च अधिकारियों के साथ अनबन एवं दुर्घटना की आशंका

मिथुन राशि - पिता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर एवं उच्च अध्ययन में विलम्ब की संभावना

कर्क राशि - ससुराल पक्ष से अनबन एवं अत्यधिक व्यय के साथ लाभ की संभावना

सिंह राशि - प्रेम संबंध में या बिजनेस पार्टनर के साथ विवाद एवं निजी क्षेत्र में कार्य कर रहे जातको को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है  

कन्या राशि – प्रतिकूल स्वास्थ्य एवं  कड़ी प्रतिस्पर्धा की संभावना यदि कोई  कोर्ट केस या कानूनी प्रकरण है तो प्रतिकूल परिणाम की संभावना

तुला राशि -  संतान संबंधी चिन्ताओ में बढोत्तरी एवं  सामाजिक संबंधों में भी परेशानियां आ सकती हैं ऋण लेने और देने से बचे

वृश्चिक राशि - शनि देव चौथे भाव में अस्त होकर ढैय्या के माध्यम से मां के संबंध में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकते हैं कोई प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बनाएं तो सतर्क रहें

धनु राशि - यात्राओं करने के दौरान परेशानी हो सकती है  भाई-बहनों के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं

मकर राशि -  पारिवारिक विवाद एवं  आर्थिक क्षति की पूर्ण संभावना शेयर मार्केट में निवेश करने बचें, क्योंकि शनि देव की दृष्टि आठवें भाव पर पड़ रही है

कुंभ राशि -  भाई-बहनों के साथ संबंध प्रभावित होंगे। विवाह में परेशानी हो सकती है कार्यस्थल पर नौकरीपेशा जातकों को काम का अधिक दबाव महसूस एवं स्वास्थ्य में गिरावट

मीन राशि -  आर्थिक परेशानिया  एवं  कर्ज में बढ़ोतरी की संभावना

ये करे उपाय –

·        दशरथकृत शनि स्त्रोत अथवा शनि स्तवराज का नित्य पाठ करे

·        अनाथ, निर्धन वर्ग की सेवा करे

·         महिलाओ का सम्मान करे

·        नंगे पैर शनि मंदिर जावे

·        काली गाय को गुड खिलावे

·        पीले कपडे और दाए हाथ पर पीला धागा बांधे

 

Saturday, February 22, 2025

सूर्य, बुध और शनि के विशेष त्रिग्रही योग में मनायी जायेगी महाशिवरात्रि

 सूर्य, बुध  और शनि के  विशेष त्रिग्रही योग में मनायी जायेगी महाशिवरात्रि

सनातन धर्म में महादेव के प्रिय दिवस महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है । इस वर्ष  महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र में  शिव योग , मकर राशि के  चंद्रमा  होने के साथ ही अमृत सिद्धि और सिद्ध योग का निर्माण शिव भक्तों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला है । वैदिक पंचांग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व बुधवार , 26 फरवरी 2025 को है एवं इसका समापन अगले दिन अर्थात गुरूवार 27 फरवरी को प्रातः  08:54 बजे होगा ।  मुख्यतया  महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को होती है, जिसे फाल्गुन मासिक शिवरात्रि भी कहा जाता है । मान्यता है कि  महाशिवरात्रि  पर माँ पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था, वही मतांतर के आधार पर यह भी मान्यता है कि महाशिवरात्रि दिवस पर भगवान शिव लिंग  के रूप में प्रकट हुए जिनकी सर्वप्रथम ब्रह्म और विष्णु ने पूजा अर्चना की थी। यह भी मान्यता है कि माता लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती और माता रति ने भी कल्याण हेतु विशेष उपासना की। इस प्रकार महाशिवरात्रि को  पर्व प्रलय और निर्माण का प्रतीक भी माना गया है ।

महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त

मान्यताओ के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया कि महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना किसी  भी समय की जा सकती है , किन्तु प्रदोष काल एवं पूजा के निमित्त निर्धारित चार प्रहर इस हेतु अति उत्तम है । साथ ही महाशिवरात्रि के संबंध में  उदया तिथि की परिपालना  जरूरी नहीं है। इन शुभ मुहूर्त में उपवास, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और विशेष अनुष्ठान एवं प्रहरनानुसार  मंत्रो का जाप कल्याणकारी  रहेगा ।

प्रथम प्रहर पूजा– सायं  06:29 से रात्रि  09 बजकर 34 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं ईशानाय नम: 

द्वितीय प्रहर पूजा - रात्रि 09:34 से  12 बजकर 39 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं अघोराय  नम: 

तृतीय प्रहर पूजा- रात्रि 12:39 से प्रातः  03 बजकर 45 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं वामदेवाय नम: 

चतुर्थ प्रहर पूजा – प्रातः  03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं सद्योजाताय नम:

निशिता काल मुहूर्त: बुधवार ,26 फरवरी 2025, मध्यरात्रि 12:09 बजे से 12:59 बजे  तक ।

महाशिवरात्रि व्रत पारण समय :-  गुरूवार ,27 फरवरी प्रातः 06 बजकर 48 मिनट से 08:54 मिनट तक ।

बन रहे ये ज्योतिषीय  संयोग 

वैदिक पंचाग के  के आधार पर इस महाशिवरात्रि अद्धभुत ज्योतिषीय योग निर्मित हो रहे है, जिसमे महाशिवरात्रि के दिन  मकर राशि में सूर्य, बुध  और शनि का विशेष त्रिग्रही योग बन रहा है। यह योग सफलता और समृद्धि का प्रतीक है। महाशिवरात्रि के दिन शिव योग और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। इन योगों में की गई पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण होती हैं। इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग में किए गए कार्य और व्रत का फल कई गुना अधिक मिलता है,जबकि इसी दिन श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र भी रहेंगे ।

ऐसे  करें महादेव को प्रसन्न    

1. महाशिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें ।

2. इसके सबसे पहले शिव भगवान की पूजा-अर्चना करें और व्रत का संकल्प लें ।

3. पूजा-अर्चना के दौरान आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए ।

4. अभिषेक  के दौरान भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान कराएं ।

5. ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें । 

6. इस दिन आप भगवान गणेश और माता पार्वती की भी पूजा करें । 

7.  शंकर भगवान को फल,    फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से पूजा करें ।

8 भगवान शिव को केसर युक्त खीर का भोग जरूर लगाएं ।

9. इस दिन पूरी रात भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाना चाहिए ।

Dr. Sanjay Geel

Sai Astrovision Society, Chittorgarh

9829747053,7425999259