Thursday, March 27, 2025

चैत्र नवरात्र 2025 - सर्वार्थ सिद्धि, इंद्र एवं रवियोग के महासंयोग में बरसेगी माँ नवदुर्गा की विशेष कृपा

 

चैत्र नवरात्र  2025

सर्वार्थ सिद्धि, इंद्र एवं रवियोग के  महासंयोग में बरसेगी माँ नवदुर्गा की विशेष कृपा

हिन्दू धर्म में मां दुर्गा के नव स्वरूपों की पूजा-अर्चना में चैत्र और आश्विन माह सहित गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है । प्रतिवर्ष हिन्दू पंचाग के आधार पर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक चैत्र नवरात्रि मनायी  जाती है । मान्यता है कि नवरात्रि का व्रत रखने और माता की अराधना से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है । सामान्यतः आंग्ल कैलेंडर के आधार पर  अप्रैल के माह में चैत्र नवरात्रि प्रारम्भ होती है, किन्तु  इस बार मार्च माह के अंत में ही चैत्र नवरात्रि स्थापना  देखने को मिल रही है ।

हिन्दू पंचांग के आधार पर ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय गील ने बताया की इस बार नवसंवत्सर 2082 में चैत्र माह की नवरात्रि  रविवार,30 मार्च 2025 से प्रारंभ होकर सोमवार ,7 अप्रैल तक रहेगी । ज्योतिषीय  गणना के आधार पर तृतीया तिथि को विलोपित बताया गया है । इस  प्रकार  शुक्रवार,4 अप्रैल को सप्तमी और शनिवार, 5 अप्रैल 2025 को दुर्गा अष्टमी यानी महाष्टमी रहेगी । साथ ही नवरात्री व्रत एवं नवदुर्गा के स्वरूपों की पूजा रविवार, 6 अप्रैल रामनवमी के दिन तक ही की जा सकेगी  । मान्यताओं के आधार पर नवरात्रि का पारण सोमवार, 07 अप्रैल को किया जा सकेगा ।  

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचाग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की इस बार चैत्र नवरात्रि में रवि- इंद्र , सर्वार्थ सिद्धि ,बुधादित्य एवं शिववास योग  और  रेवती नक्षत्र के अद्भुत संयोग में माँ  नवदुर्गा हाथी पर सवार होकर पृथ्वी  लोक पर आगमन करेगी,  जिसे  राष्ट्र एवं भक्तो के लिए  कल्याणकारी माना जा रहा है  उदया तिथि के अनुसार  चैत्र शुक्ल प्रतिपदा  रविवार 30 मार्च को है अतः इसी दिन  घट स्‍थापना होगी ।

घटस्थापना मुहूर्त-  प्रात: 06:13 से 10:22 तक ।

अभिजीत मुहूर्त-  दोपहर 12:11 से 01 :01  तक ।

चोघडीया  मुहूर्त –

लाभ अमृत  काल -प्रातः 09 :31  से 12 :36  तक

शुभ काल -  दोपहर 02:08  से 03 :41  तक

शुभ -अमृत काल -सायं 06 :46 से  रात्रि 09 :41 तक

नौ स्वरूपों की होगी पूजा

  • 30 मार्च- नवरात्रि प्रतिपदा- मां शैलपुत्री की पूजा और घट स्थापना
  • 31 मार्च- नवरात्रि द्वितीया- मा ब्रह्मचारिणी की पूजा और तृतीया - मां चंद्रघंटा की पूजा
  • 01 अप्रैल- नवरात्रि चतुर्थी- मां कुशमंडा की पूजा
  • 02 अप्रैल- नवरात्रि पंचमी- मां स्कंदमाता की पूजा
  • 03 अप्रैल- नवरात्रि शष्ठी- मां कात्यायनी की पूजा
  • 04 अप्रैल- नवरात्रि सप्तमी- मां कालरात्रि की पूजा
  • 05 अप्रैल- नवरात्रि अष्टमी- मां महागौरी की पूजा
  • 06 अप्रैल- नवरात्रि नवमी- मां सिद्धिदात्री की पूजा, राम नवमी
  • 07 अप्रैल - नवरात्रि पारण
माँ दुर्गा की कृपा आप सभी पर बनी रहे  
शुभकामनाओ सहित 
डॉ. संजय गील 
साईं  एस्ट्रो  विज़न सोसायटी , चितोडगढ़ 
9829747053,7425999259

Friday, March 21, 2025

30 साल बाद बन रहे चार महासंयोगों में उपायों से होगा अद्भुत लाभ

 30 साल बाद बन रहे चार  महासंयोगों में उपायों  से होगा  अद्भुत लाभ

ज्योतिषीय  आधार पर 30 साल बाद 29 मार्च 2025 शनिवार को 4 महासंयोग घटित हो रहे  हैं। माना जा रहा है कि इससे देश और दुनिया में बड़े परिवर्तन घटित होंगे । जहाँ कुछ राही के जातको को विशेष लाभ हो सकता है  वही इसके विपरीत कुछ के जीवन में तनाव और अवसाद देखने को मिल सकता है ।

मीन शनि योग: 29 मार्च को शनि ग्रह मीन राशि में गोचर करेगा। यह गोचर 29 की रात को 11 बजे होगा यानी इसका प्रभाव 30 मार्च से प्रारंभ होगा। इसी दिन शनि की सूर्य से युति भी बनेगी। यानी बृहस्प‍ित की राशि में सूर्य ग्रहण और शनि और सूर्य की युति भी रहेगी।

सूर्य ग्रहण: 29 मार्च को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण भी होगा। इसी दौरान सूर्य कुंभ राशि से निकलकर मीन में गोचर करके शनि ग्रह से युति बनाएंगे। यानी यह ग्रहण मीन राशि में लगेगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार 29 मार्च, दिन शनिवार को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जो कि चैत्र कृष्ण अमावस्या के दिन लगेगा। तथा भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण का समय अपराह्न 02 बजकर 21 मिनट से सायंकाल 06 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

चैत्र नवरात्रि: मतांतर से चैत्र नवरात्रि 29 मार्च 2025 शनिवार को प्रारंभ हो रही है। उदयातिथि के अनुसार 30 मार्च को प्रतिपदा हैं। प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को सुबह 06:57 पर प्रारंभ होगी और 30 मार्च को 03:19 तड़के समाप्त होगी। 

गुड़ी पड़वा: हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा भी चैत्र प्रतिपदा तिथि को रहता है। यह 30 मार्च उदयातिथि से मनाया जा जाएगा ।

इन उपायों से होगा विशेष लाभ

·       प्रातःकाल हनुमान मंदिर में जाकर आटे के दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होगी ग्रहण और शनि के प्रभाव से बचाव होगा । 

·       शनि मंदिर में जाकर छायादान करने हेतु  एक कटोरी में सरसो का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और कटोरी को शनि महाराज के चरणों में अर्पित करे  गरीबों और दिव्यांगों को भरपेट भोजन कराएं। अथवा गो शाला जाकर गाय को पीला  चारा खिलाएं।

·       निर्धन अथवा महिलाओ को भगवान विष्णु के भोग लगे हुए श्रीखंड, और मीठे चावल  वितरित करे  ।

·       माता दुर्गा को सुंदर सी चुनरी अर्पित करके उनकी मनपसंद का भोग उन्हें अर्पण करें और गरीब कन्याओं को भोजन कराएं या मीठा प्रसाद बांटें। 

 

Wednesday, March 19, 2025

वर्ष के पहले सूर्य ग्रहण के बीच 29 मार्च को शनि करेंगे कुंभ से मीन राशि में प्रवेश

 वर्ष के पहले सूर्य ग्रहण के बीच 29 मार्च को शनि करेंगे कुंभ से मीन राशि में प्रवेश

ज्योतिषशास्त्र में शनि को विशेष स्थान प्राप्त है एवं  न्याय का ग्रह माना  गया है। इसलिए जब भी शनि का राशि परिवर्तन होता है तो उसका एक बड़ा और । मुख्यतः शनि को पापी और क्रूर ग्रह कहा जाता है अतः  शनि के राशि परिवर्तन को ज्योतिष में बहुत अधिक महत्वपूर्ण मानते हुए इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिलते  है। ज्योतिषीय गणना के आधार पर शनि देव अपनी स्वाभाविक गति से संचरण के क्रम में लगभग ढाई वर्ष एक राशि में विद्यमान रहतें है, उसके बाद राशि परिवर्तन कर अगली राशि में प्रवेश करते है। वैदिक पंचांग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की भारतीय समयानुसार शनिवार ,29 मार्च 2025 रात्रि 11 बजकर 1 मिनट पर शनि गोचर करते हुए  कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे जहाँ  ये अलग अलग अवस्थाओ यथा वक्री, अस्त और मार्गी रहते हुए  ढाई वर्ष  तक अवस्थित  रहेंगे।  इस प्रकार शनि के  मीन राशि में प्रवेश करते ही  मकर राशि पर चल रही साढ़ेसाती समाप्त होकर   मेष राशि पर प्रारंभ होगी साथ ही मीन राशि पर साढ़ेसाती का द्वितीय  चरण, कुंभ राशि पर अंतिम चरण और मेष राशि पर प्रथम  चरण प्रारंभ  होगा।  कर्क एवं वृश्चिक राशि के जातकों पर ढैया समाप्त होगी जबकि सिंह और धनु राशि वालों पर ढैया की शुरुआत हो जाएगी

ख़ास बात यह भी है कि इसी दिन शनिवार होने के साथ चैत्र माह की अमावस्या तिथि में मीन राशि और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में सूर्य ग्रहण घटित होने जा रहा है साथ ही  इस दौरान, सूर्य, राहु, शुक्र, बुध और चंद्रमा सभी मीन राशि में स्थित होने से  शनि के इस गोचर को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है हांलाकि सूर्य ग्रहण का असर भारत में देखने को नहीं  मिलेगा ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर शनि जब भी मकर, कुंभ और मीन राशि में जाता है तब धरती पर बड़े पैमाने पर भूकंप, बाढ़ और युद्ध के हालात निर्मित होते हैं। खासकर मीन में  जाने पर व्यापक घटनाओं  संकेत हैं ।

राशि अनुसार प्रभाव :-

मेष राशि- शनि  के दसवें और ग्यारहवे  भाव के स्वामी होने से आत्मविश्वास में कमी रहेगी। मन अशांत रहेगा। संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध से बचें। परिवार का साथ मिलेगा। भवन सुख में वृद्धि होगी। घर-परिवार में धार्मिक कार्य होंगे। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें।

वृषभ राशि- शनि  के भाग्य और दशम  भाव के स्वामी होने से आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। मानसिक शांति भी रहेगी। फिर भी संयत रहें। व्यर्थ के क्रोध व विवादों से बचें। माता का सान्निध्य मिलेगा। कारोबार में किसी मित्र का सहयोग मिल सकता है।

मिथुन राशि- मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि अष्टम और भाग्य स्थान के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके दशम भाव में होने जा रहा है, इससे मन प्रसन्न तो रहेगा, परंतु धैर्यशीलता में कमी रहेगी। व्यर्थ के क्रोध व विवादों से बचने का प्रयास करें। शैक्षिक कार्यों में कुछ सुधार हो सकता है।

कर्क राशि- कर्क राशि के जातकों के लिए शनि सप्तम और अष्टम भाव के स्वामी होकर अकारक होते हैं और अब शनि का गोचर आपके नवम भाव में होने जा रहा है। कर्क राशि के जातकों के लिए शनि का गोचर मिला जुला रहने वाला है। अष्टम भाव के स्वामी का नवम भाव में जाने से आपको पैतृक संपत्ति को लेकर कुछ नुकसान हो सकता है।

सिंह राशि-  सिंह राशि के जातकों के लिए शनि छठे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके अष्टम भाव से होने जा रहा है। इस भाव में शनि का गोचर होने से  शनि के ढैया के प्रभाव होगा।  शनि देव का यह गोचर आपको पारिवारिक मामलों में कुछ असफलता प्रदान कर सकता है। इस समय आपके क्रोध की वृद्धि हो सकती है। आपके ऊपर कर्ज बढ़ सकता है।

कन्या राशि- कन्या राशि के जातकों के लिए शनि पंचम और छठे भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके सप्तम भाव से होने जा रहा है।  इससे मन अशांत रहेगा। आत्मसंयत रहें। क्रोध व आवेश के अतिरेक से बचें। पारिवारिक समस्याएं परेशान कर सकती हैं।

तुला राशि- तुला राशि के जातकों के लिए शनि देव चतुर्थ और पंचम भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके छठे भाव से होने जा रहा है। इससे मन प्रसन्न तो रहेगा, परंतु आत्मविश्वास में कमी रहेगी। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं। मान-सम्मान की प्राप्ति हो सकती है।

वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि तीसरे और चौथे भाव के स्वामी होते हैं और शनि का गोचर आपके पंचम भाव से होगा। मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। आत्मविश्वास भी भरपूर रहेगा। कला या संगीत के प्रति रुझान बढ़ सकता है। पिता का सान्निध्य मिलेगा। नौकरी में परिवर्तन की संभावना बन रही है।

धनु राशि- धनु राशि के जातकों के लिए शनि दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी होते हैं और अब शनि का गोचर आपके चतुर्थ भाव से होगा। इस भाव से व्यक्ति के मानसिक सुख और मां का विचार किया जाता है। इस भाव में शनि का गोचर जब होगा तो आप शनि के ढैया के प्रभाव में आएंगे।

मकर राशि- मकर राशि के जातकों के लिए शनि प्रथम और द्वितीय भाव के स्वामी होते हैं और शनि का गोचर आपके तृतीय भाव में होने जा रहा है। मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी बहुत रहेगा। धैर्यशीलता में वृद्धि होगी। संचित धन में कमी आ सकती है। वाहन सुख में वृद्धि हो सकती है।

कुंभ राशि- कुंभ राशि के जातकों के लिए शनि प्रथम भाव और द्वादश भाव के स्वामी होते हैं और शनि का गोचर अब आपके द्वितीय भाव से होने जा रहा है।  इससे आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु बातचीत में संयत रहें। नौकरी में बदलाव के योग बन रहे हैं। अफसरों से वैचारिक मतभेद बढ़ सकते हैं। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कारोबारी कार्यों में भागदौड़ रहेगी।

मीन राशि-  मीन राशि के जातकों के लिए शनि देव 11 वें और व्यय यानी कि द्वादश भाव के स्वामी होते हैं। अब शनि का गोचर आपके लग्न में ही होने जा रहा है। शनि देव जब आपके लग्न में गोचर करेंगे तो आपकी साढ़े साती का मध्य चरण शुरू होगा ।

 

Monday, March 10, 2025

होलिका दहन पर इस बार रहेगी भद्रा की छाया, चन्द्र ग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव

 

होलिका पर्व  13 को , धुलंडी 14 को मनायी जाएगी, खेले जाएंगे  रंग

होलिका दहन पर इस बार रहेगी भद्रा की छाया, चन्द्र ग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव

सनातन धर्म में होली  से एक दिन पहले होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है । होली  रंगों, उमंग और नई ऊर्जा का पर्व होने के साथ ही  बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है । साथ ही होलिका की अग्नि से आसपास और हमारे जीवन की समस्त नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है । यही वजह है कि सम्पूर्ण भारतवर्ष में होलिका दहन किया जाता है ।  आमतौर पर सूर्यास्त के बाद होलिका दहन करने की परंपरा है, लेकिन इस बार  भद्रा का निवास मृत्युलोक में होने से  होलिका दहन करने के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी ।  वैदिक पंचाग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की फाल्गुन पूर्णिमा तिथि गुरूवार,13 मार्च 2025 को सुबह 10.35 मिनट से प्रारंभ होकर  शुक्रवार,  14 मार्च को दोपहर 12.23 पर समाप्त होगी । इस बार होली पर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र,शूल योग का निर्माण हो  रहा है जो शत्रु और रोग शमन में सहायक  है। साथ ही मीन राशि में बुध, शुक्र व राहु का  संचरण एवं कुंभ राशि में सूर्य और शनि की युति को अत्यंत  पुण्यकारी माना जा रहा है ।

होलिका दहन शुभ मुहूर्त

ज्योतिषीय मान्यताओ  एवं वैदिक पंचाग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की  होलिका दहन के लिए भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि उत्तम है  एवं  इस बार  चंद्र के  सिंह  राशि में स्थित होने से  भद्रा का निवास मृत्युलोक में माना गया है जो कि  अशुभ व हानिकारक है। मुख्यतः गुरूवार, 13 मार्च को भद्रा पूंछ काल  शाम 06.57 मिनट से रात 08.14 तक रहेगा । इसके बाद भद्रा मुख का समय शुरू हो जाएगा जो रात 10.22 मिनट तक रहेगा  अतः इसी दिन रात्रि  11:26 से 12 :30 मिनट के मध्य होलिका दहन के लिए करीब 1 घंटे का शुभ मुहूर्त है ।इस प्रकार  होलिका दहन  गुरूवार, 13 मार्च को  होगा वही शुक्रवार,14 मार्च को धुलंडी मनायी जाएगी ।

रंगों के त्योहार पर नहीं होगा  चंद्रग्रहण का  प्रभाव

ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर शुक्रवार 14 मार्च को होली पर्व पर रंग खेला जाएगा एवं इसी दिन  सुबह 9 बजकर 27 मिनट से दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक चंद्र ग्रहण भी  रहेगा । इसके प्रभाव को अमेरिका, पश्चिम यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, अटलांटिक महासाागर, इटली, फ्रांस, नार्वे, स्वीडन, रूस के पूर्वी भाग में देखा जा सकेगा, किन्तु इसका प्रभाव  सम्पूर्ण भारत में नहीं रहेगा। इस प्रकार  सूतक काल भी  भारत में मान्य नहीं होगा। फिर भी ग्रहण के दौरान चंद्रमा कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में केतु की युति होने से इस अवधि में शुभ कार्यों को करने से बचना चाहिए ।

ये करे उपाय :-

  • अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो होली के दिन माता तुलसी की पूजा आराधना करे  । लाल कपड़े में तुलसी की मंजरी को बांधकर तिजोरी अथवा पर्स में रखे  मान्यता के अनुसार इससे आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलती है ।
  • वास्तु दोष से मुक्ति पाने के लिए होली के दिन तुलसी पर गुलाल अर्पित करे ।
  • लड्डू गोपाल का विधि विधान पूर्वक अभिषेक करें ।
  • होलिका दहन के समय 11 बार “ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का जाप करें ।
  • जलती हुई होलिका में सात गोमती चक्र अर्पित करें, यह धन संबंधी बाधाओं को दूर करेगा ।
  • नौकरी में अगर बाधा आ रही है या रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं, तो होलिका की अग्नि में जौ अर्पित करें और भगवान नारायण का स्मरण करें.

Thursday, February 27, 2025

कुम्भ राशि में हो रहे शनि अस्त, सभी राशियों पर पड़ेगा विविध प्रभाव

 

कुम्भ राशि में हो रहे  शनि अस्त, सभी राशियों पर पड़ेगा विविध प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में शनि का गोचर, वक्री होना और अस्त होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंभ राशि के स्वामी ग्रह शनि देव को माना गया है ग्रहों की चाल में शनि का स्वयं की राशि में अस्त होना अत्यंत  महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि  सभी नौ ग्रहों में शनिदेव की गति सबसे धीमी है वैदिक पंचांग के आधार  ज्योतिर्विद  डॉ. संजय गील ने बताया की  न्याय के देवता शनि कुंभ राशि में शुक्रवार, 28 फरवरी 2025 को रात्रि  07.06 मिनट पर अस्त होकर  और बुधवार,  9 अप्रैल 2025 को सुबह 05.03 पर मीन राशि में उदय होंगे वर्तमान में शनि कुंभ राशि में है एवं शनिवार, 29 मार्च 2025 को रात 9:41 पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे ज्योतिषीय गणनाओ  के अनुसार शनि अस्त होने के बाद अपनी कमजोर अवस्था में रहेंगे, किन्तु  वर्तमान में  सूर्य और शनि की युति कुंभ राशि में होने से सभी राशियो को प्रभावित अवश्य ही करेंगे

इसी प्रकार शनिवार,  29 मार्च 2025 को शनि के  मीन राशि में प्रवेश करते ही  कुछ राशियों  पर साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू हो जाएगी तो कुछ को इससे राहत मिलेगी मुख्यतः  शनी के गोचर के साथ ही  मकर राशि वालों पर चल रही साढ़ेसाती खत्म होकर  मेष राशि पर साढ़ेसाती प्रारंभ होगी साथ ही मीन राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण, कुंभ राशि पर अंतिम चरण और मेष राशि पर पहला चरण शुरू होगा। वृश्चिक राशि के जातकों पर जहां ढैया समाप्त होगी जबकि धनु राशि वालों पर ढैया की शुरुआत हो जाएगी ज्योतिषीय गणना और मान्यताओ के आधार पर वर्तमान में शनि अस्त के अस्त होने का प्रभाव इस प्रकार देखा जा सकेगा -

मेष राशि - सामाजिक संबंधों और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव

वृषभ राशि – रोज़गार संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है उच्च अधिकारियों के साथ अनबन एवं दुर्घटना की आशंका

मिथुन राशि - पिता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर एवं उच्च अध्ययन में विलम्ब की संभावना

कर्क राशि - ससुराल पक्ष से अनबन एवं अत्यधिक व्यय के साथ लाभ की संभावना

सिंह राशि - प्रेम संबंध में या बिजनेस पार्टनर के साथ विवाद एवं निजी क्षेत्र में कार्य कर रहे जातको को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है  

कन्या राशि – प्रतिकूल स्वास्थ्य एवं  कड़ी प्रतिस्पर्धा की संभावना यदि कोई  कोर्ट केस या कानूनी प्रकरण है तो प्रतिकूल परिणाम की संभावना

तुला राशि -  संतान संबंधी चिन्ताओ में बढोत्तरी एवं  सामाजिक संबंधों में भी परेशानियां आ सकती हैं ऋण लेने और देने से बचे

वृश्चिक राशि - शनि देव चौथे भाव में अस्त होकर ढैय्या के माध्यम से मां के संबंध में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकते हैं कोई प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बनाएं तो सतर्क रहें

धनु राशि - यात्राओं करने के दौरान परेशानी हो सकती है  भाई-बहनों के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं

मकर राशि -  पारिवारिक विवाद एवं  आर्थिक क्षति की पूर्ण संभावना शेयर मार्केट में निवेश करने बचें, क्योंकि शनि देव की दृष्टि आठवें भाव पर पड़ रही है

कुंभ राशि -  भाई-बहनों के साथ संबंध प्रभावित होंगे। विवाह में परेशानी हो सकती है कार्यस्थल पर नौकरीपेशा जातकों को काम का अधिक दबाव महसूस एवं स्वास्थ्य में गिरावट

मीन राशि -  आर्थिक परेशानिया  एवं  कर्ज में बढ़ोतरी की संभावना

ये करे उपाय –

·        दशरथकृत शनि स्त्रोत अथवा शनि स्तवराज का नित्य पाठ करे

·        अनाथ, निर्धन वर्ग की सेवा करे

·         महिलाओ का सम्मान करे

·        नंगे पैर शनि मंदिर जावे

·        काली गाय को गुड खिलावे

·        पीले कपडे और दाए हाथ पर पीला धागा बांधे

 

Saturday, February 22, 2025

सूर्य, बुध और शनि के विशेष त्रिग्रही योग में मनायी जायेगी महाशिवरात्रि

 सूर्य, बुध  और शनि के  विशेष त्रिग्रही योग में मनायी जायेगी महाशिवरात्रि

सनातन धर्म में महादेव के प्रिय दिवस महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है । इस वर्ष  महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र में  शिव योग , मकर राशि के  चंद्रमा  होने के साथ ही अमृत सिद्धि और सिद्ध योग का निर्माण शिव भक्तों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला है । वैदिक पंचांग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि का पावन पर्व बुधवार , 26 फरवरी 2025 को है एवं इसका समापन अगले दिन अर्थात गुरूवार 27 फरवरी को प्रातः  08:54 बजे होगा ।  मुख्यतया  महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को होती है, जिसे फाल्गुन मासिक शिवरात्रि भी कहा जाता है । मान्यता है कि  महाशिवरात्रि  पर माँ पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था, वही मतांतर के आधार पर यह भी मान्यता है कि महाशिवरात्रि दिवस पर भगवान शिव लिंग  के रूप में प्रकट हुए जिनकी सर्वप्रथम ब्रह्म और विष्णु ने पूजा अर्चना की थी। यह भी मान्यता है कि माता लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती और माता रति ने भी कल्याण हेतु विशेष उपासना की। इस प्रकार महाशिवरात्रि को  पर्व प्रलय और निर्माण का प्रतीक भी माना गया है ।

महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त

मान्यताओ के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया कि महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना किसी  भी समय की जा सकती है , किन्तु प्रदोष काल एवं पूजा के निमित्त निर्धारित चार प्रहर इस हेतु अति उत्तम है । साथ ही महाशिवरात्रि के संबंध में  उदया तिथि की परिपालना  जरूरी नहीं है। इन शुभ मुहूर्त में उपवास, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और विशेष अनुष्ठान एवं प्रहरनानुसार  मंत्रो का जाप कल्याणकारी  रहेगा ।

प्रथम प्रहर पूजा– सायं  06:29 से रात्रि  09 बजकर 34 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं ईशानाय नम: 

द्वितीय प्रहर पूजा - रात्रि 09:34 से  12 बजकर 39 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं अघोराय  नम: 

तृतीय प्रहर पूजा- रात्रि 12:39 से प्रातः  03 बजकर 45 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं वामदेवाय नम: 

चतुर्थ प्रहर पूजा – प्रातः  03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक ।

मन्त्र :- ॐ हीं सद्योजाताय नम:

निशिता काल मुहूर्त: बुधवार ,26 फरवरी 2025, मध्यरात्रि 12:09 बजे से 12:59 बजे  तक ।

महाशिवरात्रि व्रत पारण समय :-  गुरूवार ,27 फरवरी प्रातः 06 बजकर 48 मिनट से 08:54 मिनट तक ।

बन रहे ये ज्योतिषीय  संयोग 

वैदिक पंचाग के  के आधार पर इस महाशिवरात्रि अद्धभुत ज्योतिषीय योग निर्मित हो रहे है, जिसमे महाशिवरात्रि के दिन  मकर राशि में सूर्य, बुध  और शनि का विशेष त्रिग्रही योग बन रहा है। यह योग सफलता और समृद्धि का प्रतीक है। महाशिवरात्रि के दिन शिव योग और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। इन योगों में की गई पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण होती हैं। इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग में किए गए कार्य और व्रत का फल कई गुना अधिक मिलता है,जबकि इसी दिन श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र भी रहेंगे ।

ऐसे  करें महादेव को प्रसन्न    

1. महाशिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें ।

2. इसके सबसे पहले शिव भगवान की पूजा-अर्चना करें और व्रत का संकल्प लें ।

3. पूजा-अर्चना के दौरान आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए ।

4. अभिषेक  के दौरान भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान कराएं ।

5. ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें । 

6. इस दिन आप भगवान गणेश और माता पार्वती की भी पूजा करें । 

7.  शंकर भगवान को फल,    फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से पूजा करें ।

8 भगवान शिव को केसर युक्त खीर का भोग जरूर लगाएं ।

9. इस दिन पूरी रात भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाना चाहिए ।

Dr. Sanjay Geel

Sai Astrovision Society, Chittorgarh

9829747053,7425999259

Friday, January 24, 2025

षटतिला एकादशी पर की जायेगी माँ लक्ष्मी और श्री हरी की आराधना

 षटतिला एकादशी पर की जायेगी  माँ लक्ष्मी और  श्री हरी की आराधना  

हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु का प्रिय व्रत एकादशी व्रत  प्रति माह  दो बार किया जाता  है। पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में। प्रायः धार्मिक शास्त्रों के अनुसार एक वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं और जिस वर्ष अधिक मास पड़ता है तो उस वर्ष एकादशी की संख्या कुल 26 हो जाती हैं।  इसी सम्बन्ध में षटतिला एकादशी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन तिल का उपयोग स्नान, भोग/ प्रसाद, भोजन, दान और तर्पण में करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन तिल का अधिक से अधिक उपयोग करने से जीवन में खुशियां आती है। 

षटतिला एकादशी व्रत-पूजा का शुभ मुहूर्त :

वैदिक पंचाग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की इस वर्ष शनिवार, 25 जनवरी 2025 को षटतिला एकादशी मनाई जा रही है। 

षटतिला एकादशी तिथि का प्रारम्भ- जनवरी 24 शुक्रवार , 2025 को शाम 07 बजकर 25 मिनट से, 

एकादशी तिथि की समाप्ति- जनवरी 25शनिवार , 2025 को रात्रि 08 बजकर 31 मिनट पर। 

षटतिला एकादशी पारण (व्रत तोड़ने का) समय- रविवार ,26 जनवरी को सुबह 07 बजकर 12 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक ।

पारण तिथि के दिन द्वादशी का समापन समय- रात 08 बजकर 54 मिनट पर।

षटतिला एकादशी का महत्व

 धार्मिक मान्यतानुसार षटतिला एकादशी के दिन तिल का उपयोग करने तथा दान देने का बहुत महत्व कहा गया है। साथ ही इस दिन तिल से भगवान श्री विष्णु का पूजन करने का विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान के समय जल में तिल मिलाकर स्नान करने से जहां आरोग्य अच्छा बना रहता है, वहीं तिल से हवन-तर्पण तथा दानादि करने से पुण्यफल प्राप्त होता है। माना जाता है कि माघ मास में षटतिला एकादशी का उपवास रखने से दरिद्रता, दुर्भाग्य तथा विभिन्न प्रकार के कष्ट दूर होकर समस्त पापों ना नाश तथा मोक्ष प्राप्ति होती है ।

धार्मिक मतानुसार षट्तिला का अर्थ छह तिल होता है, और इसी कारण इस एकादशी का नाम षट्तिला एकादशी पड़ा है। इस दिन व्रतधारी छ: तरीकों से तिल का उपयोग करके भगवान श्री विष्णु की पूजा करते हैं। साथ ही इस व्रत-उपवास में तिल का विशेष महत्व होने के कारण भी भगवान श्रीहरि और माता लक्ष्मी के पूजन तथा उन्हें तिल के भोग अर्पित करने से मनुष्य की हर मनोकामना पूरी होती है। और सुख-सौभाग्य, धन-धान्य में वृद्धि होकर जीवन में वैभव प्राप्त होता है। सुहाग की रक्षा हेतु इस दिन सौभाग्यवती महिलाओं को सौभाग्य की चीजें तथा तिल की खाद्य सामग्री दान करना चाहिए। इससे जीवन में आने वाला बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। माघ मास में तपस्वियों को तिल दान करने से कभी नरक के दर्शन नहीं होते हैं और जीवन के सभी संकट दूर होकर मृत्यु के पश्चात मोक्ष प्राप्त होता है।

Thursday, January 23, 2025

मौनी अमावस्या पर सिद्धि योग में दान तर्पण करने से होगी , सौभाग्य-संपत्ति में वृद्धि(MONI AMAVASAY 2025 )

 मौनी अमावस्या पर सिद्धि योग में  दान तर्पण करने से  होगी , सौभाग्य-संपत्ति में वृद्धि

 

हिंदू धर्म में माघ अमावस्या अत्यंत महत्वपूर्ण  माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और पितरों को समर्पित है। इस अमावस्या को मौनी और माघी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान का बड़ा महत्व है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। हर साल माघ महीने की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या मनाया जाता है। हिन्दू  पंचांग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की इस वर्ष  बुधवार,29 जनवरी 2025 को सिद्धि योग में मौनी अमावस्या मनायी जाएगी । मुख्यतः मौनी अमावस्या के दिन पितरों की आत्माशांति और मोक्ष दिलाने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है और परिवार के सदस्यों पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है। इस बार मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ का द्वितीय प्रमुख शाही  स्नान भी  है।  साथ ही इस दिन मौन व्रत करने से मन काबू में होता है और ध्यान में एकाग्रता बढ़ती है।

मौनी अमावस्या शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की  मौनी अमावस्या तिथि मंगलवार, 28 जनवरी को रात 07 बजकर 35 मिनट से प्रारम्भ होकर बुधवार,29 जनवरी को शाम को 06 बजकर 05 मिनट पर समाप्त होगी । इस प्रकार  मौनी अमावस्या  बुधवार , 29 जनवरी को मनाई जाएगी।  

ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक

विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 22 मिनट से 03 बजकर 05 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 55 मिनट से 06 बजकर 22 मिनट तक

अमृत काल- सुबह 08  बजकर 38  मिनट से 10 बजकर 01 मिनट तक  

पितृदोष होगा दूर

पितृ एवं काल सर्प दोष को खत्म करने के लिए माघ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करें। साथ ही विशेष चीजों का भोग लगाएं। ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन देवी-देवता और पितृ भी पवित्र नदियों में स्नान करते आते हैं अतः यदि  मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी स्नान करें। माना जाता है कि ऐसा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और पूर्वज प्रसन्न होते हैं।

इन उपायों से  होगी सोभाग्य और  सम्पति  में  वृद्धि

माघ अमावस्या के दिन गुड़, तिल, घी, धन या फिर गर्म कपड़े का दान करें। मान्यता है कि इन चीजों का दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और धन में वृद्धि होती है । इसके अलावा व्यक्ति के रुके हुए काम पूरे होते हैं और व्यवसाय में सफलता हासिल होती है । मौनी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। इस दिन स्नानादि के बाद सूर्यदेव को जल अर्घ्य दें और उनकी पूजा-आराधना करें। मौनी अमावस्या के दिन पितरों की आत्माशांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के कार्य जरूर करें। मान्यता है कि इससे पितर प्रसन्न होते हैं।मौनी अमावस्या के दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु, माता लक्ष्मी,तुलसी के पौधे और मां गंगा की पूजा करना चाहिए।

मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत या उपवास भी रख सकते हैं। मान्यता है कि मौनी अमवस्या के दिन व्रत रखने से आत्मसंयम, मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Monday, January 20, 2025

सभी राशि के जातको पर पड़ेगा अनुकूल प्रतिकूल प्रभाव वक्री मंगल ग्रह कर रहे मिथुन राशि में प्रवेश

 सभी  राशि के जातको पर पड़ेगा अनुकूल प्रतिकूल प्रभाव

वक्री मंगल ग्रह कर रहे  मिथुन राशि में प्रवेश

 

ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है ।  मंगल ग्रह हर 45 दिनों में राशि बदलते हैं ।  मंगल के राशि बदलने का प्रभाव ज्योतिष शास्त्र की सभी 12 राशियों पर पड़ता है । इस समय  मंगल वक्री अवस्था में अपनी नीच राशि में गोचर कर रहे हैं ।  हिन्दू पंचाग  के आधार पर ज्योतिर्विद डॉ. संजय गील ने बताया की मंगल ग्रह  इस साल मंगलवार 21 जनवरी को राशि पर परिवर्तन कर बुध की राशि मिथुन में सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर प्रवेश करेंगे ।

मंगल वक्री अवस्था में मिथुन में करेंगे प्रवेश

मंगल वक्री अवस्था में मिथुन राशि में प्रवेश करने वाले हैं । मंगल ग्रह के मिथुन राशि में गोचर से सभी 12 राशियां प्रभावित होंगी, लेकिन कुछ राशियां हैं, जिनके लिए मंगल का ये गोचर लाभ देने वाला साबित हो सकता है । मंगल का ये गोचर निम्नलिखित राशि के जातको के लिए लाभकारी सिद्ध होगा, वही अन्य  राशियों को मिश्रित परिणाम प्रदान करेगा -

कर्क राशि

ग्रहों के सेनापति मंगल का वक्री अवस्था में मिथुन राशि  में गोचर कर्क राशि वालों के लिए लाभ देने वाला साबित हो सकता है ।मंगल ग्रह कर्क राशि के 12वें भाव में रहेंगे. ऐसे में कर्क राशि वालों को हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी ।नौकरी में बदलाव हो सकता है ।व्यापार के लिए बनाई गई रणनीति सफल हो सकती है ।आर्थिक स्थिति अच्छी रहने वाली है । साथ ही  बेवजह के खर्च हो सकते हैं और छोटी मोटी परेशानियां होने की संभावना है ।

सिंह राशि

मंगल का मिथुन राशि में गोचर सिंह राशि के जातकों के लिए अनुकूल है । इस गोचर से  मंगल सिंह राशि के 11वें भाव में रहेंगे । इस दौरान सिंह राशि के जातकों को किस्मत का साथ मिल सकता है । करियर के लिहाज से ये समय अच्छा रहने वाला है । करियर में विशेष सफलता मिलने के योग बनेंगे । कारोबार के लिए बनाई गई योजना सफल साबित हो सकती है एवं  मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी ।

तुला राशि

मंगल ग्रह का वक्री अवस्था में मिथुन राशि में गोचर तुला राशि के जातकों के लिए बहुत शुभ हो सकता है ।मंगल तुला राशि के 9वें भाव में रहेंगे ।इस दौरान तुला राशि के जातकों को कारोबार को लेकर यात्राएं करनी पड़ सकती है, जो की आर्थिक आधार पर लाभदायक सिद्ध होगी  । 

वृष राशि

मंगल ग्रह का वक्री अवस्था में मिथुन राशि में गोचर वृष राशि के जातकों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है । इस दौरान अचानक वृष राशि के जातकों को धन लाभ हो सकता है । इस दौरान वैवाहिक  जीवन में खुशियों का संचार होगा ।

मीन राशि

मगंल का वक्री अवस्था में मिथुन राशि में गोचर मीन राशि के जातकों के लिए अतिउत्तम  है । मंगला के इस गोचे में मीन राशि के जातको को वाहन और सम्पति अवश्य ही खरीदनी चाहिए ।

Dr. Sanjay Geel

President

Sai Astrovision Society, Chittorgarh

9829747053,7425999259

Friday, January 10, 2025

Makar Sankranti Remedies ( 19 साल बाद मकर संक्रांति पर दुर्लभ संयोग में बरसेगी सूर्य एवं शनि देव की कृपा )

 

19 साल बाद मकर संक्रांति पर दुर्लभ संयोग में  बरसेगी सूर्य एवं शनि देव की  कृपा 

हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है एवं इसे बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है । मकर संक्रांति का धार्मिक, सांस्कृतिक और खगोलीय महत्व है इस  दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे सूर्य का उत्तरायण भी कहा जाता है एवं इसके साथ ही  खरमास भी समाप्त हो जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है । मुख्यतः. धार्मिक दृष्टि से, यह दिन भगवान सूर्य की पूजा का दिन है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और सूर्य देव की आराधना करते हैं । सांस्कृतिक रूप से, यह पर्व नई फसल के आगमन की खुशी का प्रतीक है । इस दिन तिल और गुड़ से बनी चीजें खाई जाती हैं और पतंगें उड़ाई जाती हैं. खगोलीय दृष्टि से, इस दिन सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है, जिससे दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं. । भारत वर्ष में मकर संक्रांति को संक्रांति, पोंगल, माघी, उत्तरायण, उत्तरायणी और खिचड़ी आदि नाम से भी  जाना जाता है ।

मकर संक्रांति - शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचाग के आधार पर ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय गील ने बताया की मकर संक्रांति इस बार मंगलवार,14 जनवरी 2025 को ही मनाई जाएगी । इस दिन सूर्य सुबह 8 बजकर 41 मिनट मकर राशि में प्रवेश करेंगे । हिंदू पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा और महापुण्य काल का समय सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा ।

ये बन रहे रहे विशेष ज्योतिषीय संयोग

हिन्दू पंचाग के आधार पर ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय गील ने बताया की इस बार 19 वर्षो बाद मकर संक्रांति पर  विशेष संयोग निर्मित हो रहे है,जिसमे भौम पुष्प योग को अत्यंत शुभ माना जा रहा है । यह योग मंगल और पुष्य नक्षत्र के मिलन से बनता है । इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है साथ ही  इस बार माघ कृष्ण प्रतिपदा  में पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग का निर्माण भी  हो रहा है ।

 मान्यता है की मकर संक्रांति पर बन रहे इन संयोगो में सूर्य के मकर राशि में आने पर शनि से संबंधित वस्तुओं के दान व सेवन से सूर्य के साथ शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है एवं  पिता व पुत्र की आपसी मतभेद को दूर करने तथा अच्छे संबंध स्थापित करने में इन योगो का विशेष महत्व है । इसी प्रकार पितृ दोष की समाप्ति भी इस योग में उपासना करने से संभव है  

ये करे विशेष उपाय -

  • मकर संक्रांति के दिन नदियों में स्नान और चावल, दाल, तील और खिचड़ी का दान करे ।  
  • सूर्य देव की उपासना कर घर पर पूर्व दिशा में ताम्बे का सूर्य स्थापित करे
  • ॐ ह्रीं सूर्याय नमः, ॐ घृणिः सूर्याय नमः, ॐ आदित्याय नमः, ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्, ऊँ खखोल्काय स्वाहा का जाप अथवा माघ माहात्म्य का पाठ करें ।
  • गौशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें ।
  • जरूरतमंद लोगों को ऊनी वस्त्र या कंबल का दान जरूर करें ।